BREAKING NEWS: देशव्यापी साइबर फ्रॉड गिरोह का भंडाफोड़, डिजिटल अरेस्ट और बैंकिंग फ्रॉड करने वाला मुख्य सरगना गिरफ्तार!
नई दिल्ली:
देश में तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों पर नकेल कसने के लिए केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) और विभिन्न राज्यों की पुलिस टीमों ने एक बड़ा संयुक्त अभियान चलाकर अंतरराज्यीय साइबर क्राइम सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। इस विशेष ऑपरेशन के तहत देश के अलग-अलग हिस्सों से गिरोह के 12 मुख्य सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। यह गिरोह आम जनता को 'डिजिटल अरेस्ट', पार्ट-टाइम जॉब्स और शेयर मार्केट में भारी मुनाफे का लालच देकर करोड़ों रुपये की ठगी कर रहा था।
कैसे काम करता था यह नेटवर्क?
जांच अधिकारियों के अनुसार, यह गिरोह हाई-टेक तकनीकों और फर्जी सिम कार्ड्स का इस्तेमाल करके लोगों को टारगेट करता था। हाल के महीनों में 'डिजिटल अरेस्ट' के मामले तेजी से सामने आए थे, जिनमें फर्जी पुलिस या ED अधिकारी बनकर लोगों को डराया-धमकाया जाता था। यह सिंडिकेट फर्जी बैंक खातों (म्यूल अकाउंट्स) का उपयोग करके ठगी की रकम को तुरंत क्रिप्टो-करंसी में बदलकर विदेश ट्रांसफर कर देता था, जिससे पैसे का ट्रैक रखना मुश्किल हो जाता था।
छापेमारी में मिलीं ये चीजें:
छापेमारी के दौरान पुलिस और जांच एजेंसियों ने भारी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री बरामद की है:
- 50 से अधिक प्रीमियम स्मार्टफोन और लैपटॉप
- 200 से ज्यादा एक्टिवेटेड फर्जी (प्री-एक्टिवेटेड) सिम कार्ड
- विभिन्न बैंकों के 80 से ज्यादा पासबुक और एटीएम कार्ड
- कई लाख रुपये की नकदी और फर्जी सरकारी दस्तावेजों की फाइलें
पुलिस और साइबर सेल की चेतावनी:
साइबर क्राइम ब्रांच ने नागरिकों के लिए एक एडवाइजरी भी जारी की है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि कोई भी सरकारी एजेंसी या पुलिस कभी भी किसी व्यक्ति को वीडियो कॉल पर 'डिजिटल अरेस्ट' नहीं करती और न ही पैसे ट्रांसफर करने की मांग करती है। यदि आपके साथ या आपके आसपास ऐसा कोई संदिग्ध कॉल या मैसेज आता है, तो तुरंत 1930 राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करें या आधिकारिक वेबसाइट cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।
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