सावधान! 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर नया साइबर क्राइम नेटवर्क, लाखों उड़ाने वाले गिरोह का पर्दाफाश
नई दिल्ली / देश की ताज़ा क्राइम रिपोर्ट:
डिजिटल दुनिया में जहाँ सुविधाएं बढ़ी हैं, वहीं साइबर अपराधियों का खौफ भी लगातार पैर पसार रहा है। हाल ही में पुलिस और साइबर क्राइम सेल ने मिलकर एक ऐसे ही अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो आम लोगों को 'डिजिटल अरेस्ट' का डर दिखाकर करोड़ों रुपये की ठगी कर रहा था।
क्या है डिजिटल अरेस्ट और कैसे शिकार बनाते हैं ठग?
नकली पुलिस/CBI अफसर बनना: ठग पीड़ित को वीडियो कॉल या फोन करते हैं और खुद को CBI, कस्टम्स या नारकोटिक्स विभाग का बड़ा अधिकारी बताते हैं।
फर्जी मुकदमे का डर: पीड़ित से कहा जाता है कि उनके नाम से कोई पार्सल पकड़ा गया है जिसमें गैर-कानूनी सामान (ड्रग्स या फर्जी पासपोर्ट) मौजूद है।
कमरे में बंद रहने की हिदायत: इसके बाद वीडियो कॉल चालू रखकर पीड़ित को कमरे से बाहर न जाने और किसी से बात न करने को कहा जाता है। इसे ही ये अपराधी 'डिजिटल अरेस्ट' का नाम देते हैं।
ब्लैकमेलिंग और पैसों की मांग: केस से नाम हटाने और अरेस्ट वारंट रद्द करने के एवज में तुरंत लाखों रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवा लिए जाते हैं।
जांच में सामने आया बड़ा नेटवर्क
पुलिस की त्वरित कार्रवाई से इस नेटवर्क के मुख्य सरगना को गिरफ्तार कर लिया गया है। शुरुआती जांच में पता चला है कि यह गिरोह फर्जी बैंक खातों (Mule Accounts) के जरिए पैसों को डाइवर्ट करता था और विदेशों में बैठे आकाओं तक पैसे पहुंचाता था। पुलिस ने इनके पास से दर्जनों सिम कार्ड, महंगे मोबाइल फोन और कई फर्जी दस्तावेज बरामद किए हैं।
साइबर एक्सपर्ट्स और पुलिस की चेतावनी
कानून में कोई 'डिजिटल अरेस्ट' नहीं: पुलिस या कोई भी सरकारी एजेंसी कभी भी वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ्तार नहीं करती और न ही फोन पर पैसों की मांग करती है।
घबराएं नहीं, तुरंत रिपोर्ट करें: यदि आपके पास ऐसा कोई संदिग्ध कॉल आए, तो बिना डरे तुरंत फोन काट दें और राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें या नजदीकी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराएं।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें